काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक महत्व: शिव की नगरी का हृदय

काशी की आत्मा को अगर किसी एक स्थान में देखा जा सकता है,

तो वह स्थान है काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक महत्व: शिव की नगरी का हृदय

यही कारण है कि काशी को शिव की नगरी कहा जाता है।

जो व्यक्ति काशी क्या है यह समझना चाहता है,

उसे काशी विश्वनाथ के बिना काशी की कल्पना अधूरी लगेगी।

ज्योतिर्लिंग का अर्थ क्या होता है?

ज्योति’ का अर्थ है प्रकाश

और ‘लिंग’ का अर्थ है प्रतीक

अर्थात ज्योतिर्लिंग वह स्थान है

जहाँ शिव प्रकाश स्वरूप में प्रकट होते हैं

न किसी आकार में बंधे हुए,

न किसी सीमा में।

इसी प्रकाश की अनुभूति

आनंदवन क्या है जैसे विषयों को समझने में सहायता करती है।

काशी विश्वनाथ और काशी का संबंध

शास्त्रों में कहा गया है कि

काशी स्वयं शिव के त्रिशूल पर स्थित है और काशी विश्वनाथ उस त्रिशूल का केंद्र बिंदु हैं।

काशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?

यह प्रश्न स्वतः स्पष्ट हो जाता है।

काशी विश्वनाथ और मृत्यु–मोक्ष का संबंध

काशी में मृत्यु को मोक्ष से जोड़ा जाता है।

इस विश्वास का मूल काशी विश्वनाथ में ही छिपा है।

मान्यता है कि काशी में मृत्यु और मोक्ष का संबंध

विश्वनाथ की उपस्थिति के कारण ही संभव है।

यही वह चेतना है जो मृत्यु को भय नहीं, बोध बना देती है।

काशी विश्वनाथ और तारक मंत्र

शास्त्रों के अनुसार

देह त्याग के समय

भगवान शिव स्वयं जीव को

तारक मंत्र क्या है

इसका बोध कराते हैं।

यह मंत्र कोई शब्द नहीं,

बल्कि शिव की उपस्थिति का अनुभव है,

जो आत्मा को स्थिर कर देता है।

विश्वनाथ और मणिकर्णिका घाट

काशी विश्वनाथ और मणिकर्णिका घाट का रहस्य

एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।

विश्वनाथ चेतना का केंद्र हैं,

और मणिकर्णिका

उस चेतना की पूर्णता।

इसीलिए काशी में जीवन और मृत्यु

एक-दूसरे के विरोधी नहीं,

पूरक माने जाते हैं।

क्या केवल दर्शन से सब कुछ मिल जाता है?

काशी विश्वनाथ का दर्शन

केवल आँखों से देखने का विषय नहीं है।

यह दर्शन तभी पूर्ण होता है

जब व्यक्ति भीतर से

थोड़ा रुक जाए,

थोड़ा झुक जाए।

यही भाव आनंदवन की अनुभूति कराता है।

काशी विश्वनाथ का वास्तविक महत्व

काशी विश्वनाथ

सिर्फ एक मंदिर नहीं हैं।

वे काशी की धड़कन हैं,

उस चेतना का केंद्र हैं

जो जीवन और मृत्यु

दोनों को एक सूत्र में बाँध देती है।

इसीलिए कहा जाता है

जो काशी विश्वनाथ को समझ लेता है,

वह काशी को समझ लेता है।

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