काशी में कोई नहीं आता, काशी बुलाती है, वाराणसी की रहस्यमयी पुकार

बनारस– भारत का आध्यात्मिक शहर जिसे पृथ्वी का सबसे पुराना जीवंत शहर कहा जाता है, उसके नाम से भी जाना जाता है। काशीनगरी के बारे में कहा जाता है I बनारस 3000 साल से भी पुराना शहर है, बाबा विश्वनाथ की नगरी , गंगा आरती, घाट (84 घाट), लस्सी, पान और मोक्ष द्वार के लिये जाना जाता है I

“काशी में कोई नहीं आता…काशी बुलाती है”

Kashinagari
काशीनगरी

अगर आप बनारस को सिर्फ एक ट्रैवल डेस्टिनेशन समझ रहे हैं, तो बिल्कुल भी ऐसी गलती मत करना। बनारस एक जिंदगी का स्कूल है, जहां संस्कृति भी जीती है और सुकून भी।

आज हम यहां बात करेंगे बनारस के रहन-सहन, खाना-पीना, गलियाँ, प्रसिद्ध हस्तियाँ, मंदिर, घाट, पढाई-लिखाई, संस्कृति के बारे में |

बनारस का इतिहास: 3000 वर्षों से जीवित एक शहर

गूगल, यूनेस्को और इतिहासकारों के शोध के अनुसार:

वाराणसी को 3000 वर्षों से भी अधिक पुराना एक निरंतर बसा हुआ धार्मिक  शहर माना जाता है।

ऋग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में काशी का उल्लेख मिलता है।

इस शहर की सभ्यता रोम और एथेंस से भी पुरानी है।

बनारस के बारे में एक विशिष्ट तथ्य:

“यहाँ मृत्यु भी एक उत्सव जैसी लगती है, क्योंकि यहाँ मोक्ष की कामना पूरी होती है।”

वाराणसी के मंदिर: काशी का धर्म, दर्शन और दिव्यता का असली दरबार

बनारस सिर्फ घाट और गलियों का शहर नहीं है।

काशी में इतने मंदिर हैं की कहवात बन गई:

“काशी में हर गली में एक शिवलिंग, और हर मोड़ पर एक मंदिर।”

ऐतिहासिक रूप से, वाराणसी में 23,000 से अधिक मंदिर प्रलेखित हैं।

हर मंदिर का एक अलग रंग, अलग रस, अलग कहानी।

1. काल भैरव मंदिर – काशी के कोतवाल

बनारस में कानून, नियम, धर्म सब के मालिक-काल भैरव।

कहिए तो काशी के एसपी-कोतवाल। 

यहां का “भैरव नाल” (पवित्र धागा) पहनना शुभ माना जाता है

“काशी में प्रवेश भैरव बिना नहीं होता।”

2. काशी विश्वनाथ मंदिर – बनारस का दिल, धरोहर और धर्म का दरबार (मंदिर को “ज्योतिर्लिंगों का महाराजा” भी कहा जाता है) 

“काशी विश्वनाथ दर्शन बिना बनारस यात्रा अधूरी है।”

3. अन्नपूर्णा देवी मंदिर – बनारस की माता रानी

कहा जाता है कि बनारस में कोई “भूखा” नहीं सोता

4. दुर्गा मंदिर (दुर्गा कुंड) – शक्ति 

5. तुलसी मानस मंदिर – रामायण लिखे जहां लिखा गया

यहीं वह स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस लिखी।

6. संकट मोचन हनुमान मंदिर – मन का शांति केंद्र

7. नया विश्वनाथ मंदिर (बीएचयू परिसर)

8. भारत माता मंदिर – भारत का एकलौता मंदिर जहां भगवान की मूर्ति नहीं

“बनारस में मंदिर भी मिलता है, मोक्ष भी मिलता है, और मस्ती भी मिलती है – इसलिए काशी तो काशी है!”

बनारस का लाइफस्टाइल (रहन-सहन)

बनारस का लाइफस्टाइल एकदम आसान, बिंदास है।

इधर के लोग टेंशन नहीं लेते – चाय लेते हैं।

साधारण पहनावा: धोती-कुर्ता, साड़ी, अंगवस्त्र (पुरुषों द्वारा कंधे का कपड़ा गमछा)

अतिथि-अनुकूल संस्कृति

प्रातःकालीन अनुष्ठान: गंगा स्नान, आरती, योग

शाम का विश्राम: चाय + घाट + बातें

“का करें बबुआ, हम बनारसी… काम से पहले आराम।”

बनारस की गलियों में: एक अलग ही दुनिया बसती है

बनारस में 3500+ से ज़्यादा गलियाँ डॉक्युमेंटेड हैं।

इनमें से कुछ 2 स्कूटर तक नहीं गुजर सकते।

गलियों में मिलता है:

रबड़ी

कचौड़ी

जलेबी

ठंडाई

छोटी-छोटी दुकाने

और दुनिया का सबसे मस्त हास्य

बनारस की संकरी गलियों को संयुक्त राष्ट्र पर्यटन ने सांस्कृतिक भूलभुलैया श्रेणी में रखा है।

बनारस का खाना: स्वाद का तीर्थ (सर्वाधिक खोजा गया विषय)

1. बनारसी कचौड़ी-जलेबी

अगर सुबह 7 बजे नहीं खाओगे तो बनारस ने तुम्हें स्वीकार ही नहीं किया।

2. लस्सी

कुल्हड़ में जो झाग आती है, वो बनारस की जान है।

3. मलइयो

सिर्फ नवंबर-जनवरी में मिलता है – ओस-ठंढ से बंटा है।

ये बनारस का वैज्ञानिक मिठाई है.

4. बनारसी पान

500+ साल पुरानी परंपरा.

अमिताभ बच्चन का प्रतिष्ठित संवाद:

“खइके पान बनारस वाला…”

ये बनारस की आधिकारिक संगीत पहचान है.

5. टमाटर चाट

बनारस के घाट (84 Ghat)

दशाश्वमेध घाट

दैनिक गंगा आरती

सर्वाधिक पर्यटक-अनुकूल

अस्सी घाट

सुबह-ए-बनारस का आयोजन

योग + संगीत + सूर्योदय

स्टूडेंट हैंगआउट हब

मणिकर्णिका घाट

शाश्वत अग्नि (सैकड़ों वर्षों से जलती हुई), मोक्ष घाट

हरिश्चंद्र घाट (वैदिक दाह संस्कार परंपराएँ)

सांस्कृतिक महत्व

नमो घाट

ललिता घाट

अहिल्या घाट

पंच गंगा घाट

मान मंदिर घाट

अहिल्या घाट

पढाई-लिखाई: बीएचयू का इतिहास 

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू): 

4 फरवरी 1916 को स्थापना हुई

एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय

1300+ एकड़, 35,000+ छात्र

संस्थापक मदन मोहन मालवीय जी का प्रलेखित संवाद:

“बीएचयू राष्ट्र और संस्कृति के लिए एक आध्यात्मिक गुरुकुल होगा।”

बनारस की प्रसिद्ध हस्तियाँ 

कबीर दास

“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।”

तुलसीदास

“तुलसी ऐसे लोगों को, सीखिये सो क्या होय।”

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान

“मेरी शहनाई बनारस के बिना अधूरी है।”

पंडित रविशंकर

“संगीत ईश्वर की भाषा है।”

प्रेमचंद (वाराणसी में जन्मे)

“ज़िंदगी एक संघर्ष है।”

बनारस की संस्कृति, संगीत और त्यौहार

बनारस = संगीत और अध्यात्म का मिश्रण।

महत्वपूर्ण त्यौहार:

सावन का महीना

देव दीपावली

महाशिवरात्रि

नाग नथैया

गंगा महोत्सव

संगीत विरासत:

बिस्मिल्लाह खान

गिरिजा देवी

किशन महाराज

राजन-साजन मिश्र

बनारस का एटीट्यूड: ठेठ देसी स्वैग

बनारस वाला एक ही लाइन में पूरा दर्शन समझा देता:

“हम बनारसी हैं… 

जोर जोर से हंसना, स्वाद लेते हैं और जिंदगी को मस्त बनाते हैं।

यात्रा टिप

घूमने का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर-मार्च

सबसे अच्छा फोटोग्राफी सीज़न

अक्टूबर-मार्च

कहाँ रहा जाए

असि

गोदौलिया

लंका

शिवाला

लोकप्रिय व्यंजन

मलइयो

लस्सी

चाट

पान

ठंडाई

मिस न करने लायक चीज़ें

सुबह-ए-बनारस

संध्या आरती

बी.एच.यू. कैम्पस का दौरा

विश्वनाथ गली शॉपिंग

बनारस में जिंदगी का स्वाद अलग ही है

बनारस एक शहर नहीं, एक एहसास है.

यहां के घाट, गलियां, लोग, लस्सी, पान – सब एक अलग ही जज्बा बनाते हैं।

यहां आते ही समझ आ जाता:

“बनारस का स्वैग अलग, बनारस का रस अलग, और बनारस का असर अलग।”

अगर आप भारत की असली संस्कृति को महसूस करना चाहते हैं, तो बनारस आना ही पड़ेगा